संसार में बच्चों के लिए माँ सबसे बड़ा वरदान है। माँ बच्चेको 9 महीने अपनी कोख में रखती है। माँ केअन्दर ही वो शक्ति है जो एक बच्चे को जन्म दे सकती है। जितनी सावधानियों के साथ माँ बच्चे को अपनी कोख में रखती है उससे कही ज्यादा सावधानी माँ के साथ साथ फॅमिली के सभी सदस्यों को एक बच्चे के जन्म के बाद रखनी पड़ती है| कुछ जरूरी बातों ध्यान रखकर अपने नवजात शिशु को हमेशा स्वाथ्य एवं सुरक्षित रखिये।
*बच्चे के जन्म के कुछ दिनों तक उसकी (umbilical cord )गर्भ नाल सही से सुखी नहीं होती है इसीलिए उसका अच्छे से ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर के द्वारा दिए गए दवा को टाइम से उस पर लगाना चाहिए और उसकी सफाई का ध्यान देना चाहिए। किसी तरह की चोट या गन्दगी उसमे न लगने पाए नहीं तो पकने का डर रहता है।
* स्तनपान (Breast Feeding or Feeding)-बेबी केयर टिप्स में न्यू बोर्न बेबी के लिए सबसे पौष्टिक आहार माँ का दूध होता है इससे बेहतर और दूसरा कोई आहार नहीं है। बच्चे के जन्म लेने के 30 मिनट के अंदर ही माँ का गाढ़ा पीला दूध पिलाना बहुत जरूरी होता है। यह दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। इस दूध को देना जरूरी होता है वो चाहे बच्चे का जन्म ऑपरेशन से हो या नार्मल हो बच्चे को ये दूध दिया जा सकता है। 
बच्चे को 6 महीने तक सिर्फ माँ का दूध देना चाहिए और कुछ भी बच्चे को नहीं देना चाहिए। शुरुआत के 6 महीने माँ के दूध से ही बच्चे को सम्पूर्ण आहार मिल जाता है पानी की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
माँ के दूध से बच्चे की इम्युनिटी बढ़ती है ,जिससे बच्चे को रोग से लड़ने की शक्तिं बढ़ती है और बच्चा रोगो से सुरक्षित रहता है। बच्चे को 24 घंटे में कम से कम 12 से 13 बार दूध पिलाना चाहिए। हर 2 से 3 घंटे में एक बार दूध पिलाना चाहिए।
बच्चे को दूध पिलाते वक़्त माँ को ये ध्यान देना जरूरी होता है की बच्चा सही पोजीशन में हो।
*कुछ माये जो बच्चे को किसी परेशानी की वजह से दूध नहीं पिला सकती या जिनको दूध नहीं होता है वो लोग बच्चे को बेबी फ़ूड और पाउडर वाला दूध पिला सकते है। बच्चे का जो पाउडर वाला दूध होता वो भी बहुत ही पौष्टिक होता है क्यूंकि वो दूध भी माँ के दूध में जो चीज़े होती है उसी फॉर्मूले से बना होता है।
लेकिन इस दूध को पिलाने के लिए कुछ सावधानियाँ बरतनी पड़ती है।
*दूध को बनाते वक़्त अपने हाथों को साफ़ करना चाहिए।
* दूध के पाउडर और पानी ratio सही मात्रा में होना चाहिए।
*सही रेश्यो ना होने पर बच्चे की तबियत ख़राब हो सकती है।
*दूध को बोतल में डालने से पहले बोतल को अच्छे से साफ़ करना जरूरी होता है नहीं तो बच्चा इससे भी बीमार हो सकते हैं। इससे बच्चे को उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है।
*पीने के बाद बोतल में बचे हुए दूध को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए उससे जाता देना चाहिए। उसे बच्चे को फिर से नहीं पिला सकते है। ये बच्चे की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है।
*बच्चे को जन्म के 6 महीने तक कोई भी ठोस आहार या पानी नहीं देना चाहिए।
डकार दिलाना (Burping )-बेबी केयर टिप्स में दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बहुत ही जरूरी होता है। बच्चा जब दूध पीता है तो बच्चे के मुँह से हवा अंदर चली जाती है इसलिए दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो बच्चे को गैस की समस्या हो जाती है।
दूध पिलाने के बाद डकार दिलाने के लिए बच्चे को अपने कंधे पर ले और फिर उसके पीठ को धीरे धीरे थपकी मारे ,जब बच्चे को डकार आ जाये तो उससे लिटा सकते है।
*बच्चे को गोद में लेने का और उठाने का सही तरीका -(बेबी केयर टिप्स) बच्चे बहुत ही नाजुक होते बिल्कुल एक फुल की तरह इसीलिए बच्चे को उठाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धोये ,फिर बच्चे को उठाये। बच्चे को उठाते वक़्त आपका एक हाथ उसके सर के पास रखे और दूसरा हाथ उसके कमर के पास रखना चाहिए।
*बच्चे को बहुत झटके के साथ नहीं उठाना चहिये झटके से उठाने पर बच्चे के ब्रेन में प्रॉब्लम हो सकता है ,ब्रेन के साथ साथ उसके बॉडी में प्रॉब्लम हो सकता है क्यूंकि बच्चो की बॉडी बहुत ही नाजुक होता है। बच्चे खुद से सम्हाल नहीं सकते है इसीलिए उन्हें बहुत ही ध्यान से उठाना चाहिए।
बच्चे को हवा में नहीं उछलना चाहिए।
*कुछ और भी जरूरी बातों का ध्यान बेबी केयर टिप्स में हमे देना चाहिए जैसे बच्चे को किस तरह से नहलाना चाहिए। बच्चे को नहलाने के लिए पहले बच्चे को अपने पैरों पैर लिटाये फिर उसके सर के नीचे के हिस्से को अच्छे से साफ़ करे उसके बाद उसके सर को सपोर्ट देते हुए साफ़ करे और फिर उससे एक साफ़ टॉवल में लपेटे थोड़ी देर उसी में रहने दे। जिससे टॉवल सारा पानी अब्सॉर्ब कर ले और आपको बच्चे को ज्यादा रगड़ने की जरूरत ना पड़े।
*बच्चे को कपडे भी बहुत सोच समझकर पहनाना चाहिए। छोटे बच्चो को हमेशा बहुत ही सॉफ्ट और आराम देने वाले कपडे पहनाने चाहिए चुभने वाले कपडे नहीं पहनाने चाहिए।
*डॉक्टर की सलाह कब ले -अगर बच्च दूध नहीं पी रहा हो तो हमे डॉक्टर कंसल्ट करना चाहिए। बच्चा पुरे दिन में कम से कम 8 से 10 बार टॉयलेट करता है। अगर वो 2 ,3 बार करे तो भी हमे डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। यदि बच्चे उल्टी ,लैटरिंग की समस्या हो तो भी बिना डॉक्टर की सलाह लिए कोई दवा न दे। बच्चे में अगर कुछ अलग लक्षण दिखे तो भी डॉक्टर को जरूर कंसल्ट करे।
*बेबी केयर टिप्स में इन सभी सावधानियों के बाद एक और भी महत्वपूर्ण सावधानी माँ को बरतनी चाहिए। माँ को चाहिए की वो अपने खाने पीने का ख़ास ख्याल रखे क्यूंकि माँ जैसा आहार लेगी उसका पूरा असर बच्चे को होता है। इसीलिए माँ को पौस्टिक आहार लेना चाहिए। जैसे -दाल ,दूध,फल,हरी सब्जियाँ आदि और खट्टी चीज़ो को अवॉयड करना चाहिए नई तो बच्चे दूध को डाइजेस्ट नहीं कर पाते है और उल्टी करने लगते है।

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