वाक्सिनेशन और रिकॉर्ड बुक -:
मैं अपने इस पोस्ट में आपको बच्चों के वाक्सिनेशन के बारे में बताएँगे। हमें हॉस्पिटल में एक रिकॉर्ड बुक दी थी यह छोटी सी बेबी बुक है जिसमें दो इंपॉर्टेंट चीजें इस राइट सहित के पेज पर है लिस्ट उन सारी वैक्सीनेशंस की और जो बेबी को बचपन से लेकर 10 से 12 साल तक देनी है क्लियर ही बताया गया है कि कौन सी वैक्सीनेशन कब लगेगी और यहां पर एक और टेबल है जिसमें बताया जाता है कि जो वैक्सीन लग चुकी है उसकी डेट और अगली कब लगेगी उसकी डेट।
आपको एक रिकॉर्ड मेंटेन करना है और करने में हेल्प करता है बेबी बुक आपको भी और आपके डॉक्टर को भी तो हर बार जब हम डॉक्टर के पास जाते हैं हम इसको लेकर जाते हैं और यह क्यों जरूरी है क्योंकि वैक्सीनेशन जो है वह आप अपनी मर्जी से कभी भी नहीं करा सकते वक्सीनेशन का एक टाइम होता है अगर आपको टाइम लाइन मिस कर देंगे तो जो बॉडी में उसका इफेक्ट होता है वह कम होना शुरू हो जाता है और बॉडी उसको अडॉप्ट नहीं कर पाती है तो यह बहुत ध्यान रखिए दो तो वैक्सीनेशन टाइम पर होना सबसे जरूरी चीज है इसीलिए अगर आपको ऐसा कोई चार्ट अपने हॉस्पिटल से अपने डॉक्टर से नहीं मिला तो आप अगली विजिट में ऐसा एक चार्ट उनसे लीजिये या अपने आप एक नोट पर लेकर पूरा चार्ट बना लीजिए जिससे आप इसे कभी मिस नहीं करेंगे। एक पेरेंट्स होने के कारन बहुत बहुत जरूरी है यह आपके बच्चों की जो फाइटिंग पावर है बहुत मेजर डिसीसिस है उसमें आपको हेल्प करेगा हमें आधी से ज्यादा बीमारी होती है इसलिए क्योंकि हम टाइम पर उनकी बात कनेक्शन नहीं लेते है।
दोस्तों आजकल इन्वायरमेंट है वह इतनी तेजी से चेंज हो रहा है इसमें ढेर सारी नई नई बीमारी आ रही है अगर आप देखेंगे ऐसी ऐसी चीज है जो आपने कभी सुना भी नहीं होगा हमारे पेरेंट्स के टाइम पर कभी होता भी नहीं था तो कैसे टाइम बदल रहा है और बीमारियां बदल रहे हैं इसी वजह से यह ऑप्शन वैक्सीनेशन रखी जाती है जो बच्चों के लिए जरूरी होते हैं ताकि उनको यह जो बीमारियां भी आजकल नयी नयी आती जा रही है वह भी ना लगे
और उनका जो खतरा है इन बीमारियों से कम हो जाए तो कोशिश करें यह वैसे ही पर्सनल कॉल होती है क्योंकि इसमें भी पैसे खर्च होते हैं और हर किसी का अपना फाइनैंशल होता है बट कोशिश करें कि अगर आप कर सके तो आप ऑप्शनल वाक्सिनेशन भी जरूर लगाएं जो आज पैसे आप बचाएंगे वह कल अगर उसको खुदा ना खास्ता बीमारी हो जाती है तो आप बहुत रिपेंट करेंगे कि आपने यह क्यों बचा लिया और डॉक्टर भी तब आपको यह बोलेंगे क्यों नहीं लगाई थी और तो इसलिए हमारी रिकमेंडेशन है कि आप जो दूसरी ऑप्शनल वैक्सीन को भी अपने बच्चों को जरूर लगाएं मेडिकल हेल्थ के मामले में अपने बच्चे के साथ कोई लापरवाही न करे। तो सबसे ज्यादा जरूरी चीज़ वाक्सिनेशन के होती है उसका रिकॉर्ड बुक होना।
वैक्सीन देने के बाद ध्यान देने वाली बातें -:
काफी लोगों को यह समझते हैं कि वाक्सिनेशन होने के बाद बच्चों को जो दर्द होता है और फीवर आता है उसकी वजह से उसे अवॉयड करते है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए। कुछ वैक्सीन होती है जिसमे बच्चों को दिक्कत होती है और कुछ में नहीं होता है। और कुछ तो बच्चों के ऊपर भी डिपेंड करता है।
बच्चों को जब वैक्सीन लगायी जाती है तो डॉक्टर पहले ही बता देते है की बच्चों को क्या क्या प्रॉब्लम हो सकती हैऔर उस हिसाब से उसकासोल्युशन भी बता देते है। वैक्सीन जो दर्द और फीवर वाले होते है ऐसे वैक्सीन में नार्मल फीवर की दवा बच्चों को दो से तीन बार दिन में देना होता है और सेकाई भी की जाती है। 1 या 2 दिन के लिए जिस जगह पैर इंजेक्शन लगा होता है वह बार बार टच नहीं करना चाहिए और बच्चे का मसाज भी नहीं करना चाहिए। ये सब प्रॉब्लम 2 दिन में सही हो जाती है।
वाक्सिनेशन चार्ट -:
Birth-BCG,OPV-0,HEP B-0
6WEEKS-DPT-1,HEP B-1,OPV-1
10WEEKS-DPT-2,HEP B-2,OPV-2
14 WEEKS-DPT-3,HEP B-3,OPV-3
9 MONTHS-VITAMIN A(1000000IU)
9MONTHS-JAPANESE ENCEPHLATIS(In Endemic Area)
16 MONTHS-DPT Booster1,OPV Booster1
16 MONTHS-JAPANESE ENCEPHLATIS-2(in Endemic Area)
16 MONTHS -Measlers&Mumps,Rubella(MMR)
16MONTHS-2nd dose of vitamin-A
5YEARS -2nd dose of DPT Booster
10&16 YEARS-Tetanus toxoid



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